
भारत के प्रख्यात उद्योगपति और स्वाधीनता सेनानी श्री कमलनयन बजाज की 111वीं जयंती के अवसर पर उनकी गौरवशाली जीवन यात्रा को समर्पित विशेष लघु फिल्म का लोकार्पण उनके सुपुत्र और बजाज फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री शिशिर बजाज द्वारा शुक्रवार, 23 जनवरी, 2026 को किया गया।
बजाज समूह परिवार द्वारा निर्मित और यू-ट्यूब पर उपलब्ध यह विशेष लघु फिल्म श्री कमलनयन बजाज के महान व्यक्तित्व और उनके असाधारण जीवन एवं युग को जीवंत करती है, जिन्होंने बजाज समूह की सच्ची उद्यमशील नींव रखी और भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह स्मृतिजनक फिल्म श्री कमलनयन बजाज की उस यात्रा को दर्शाती है, जिसमें वे महात्मा गांधी से प्रेरित एक युवा स्वतंत्रता सेनानी से एक दूरदर्शी उद्योगपति और राष्ट्रनिर्माता बने। वे मानते थे कि व्यवसाय केवल लाभ कमाने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र की सेवा करने का एक पुनीत देशभक्ति कर्तव्य है। 23 जनवरी, 1915 को जमनालाल बजाज और जानकीदेवी बजाज के घर जन्मे कमलनयन बजाज तीन महान व्यक्तित्वों के नैतिक प्रभाव में पले-बढ़े—अपने पिता जमनालाल बजाज, अपने मार्गदर्शक महात्मा गांधी और अपने गुरु आचार्य विनोबा भावे। जीवन में प्रवेश करते समय ही उनके मूल्य स्पष्ट थे। मात्र 15 वर्ष की आयु में उन्होंने दांडी मार्च में भाग लिया और स्वदेशी व खादी आंदोलनों के प्रारंभिक समर्थक बने। उस दौर में, जब आर्थिक सशक्तिकरण स्वतंत्रता आंदोलन के लिए आवश्यक था, वे मानते थे कि उद्देश्य पद या सत्ता से पहले आना चाहिए और उद्यम का लक्ष्य राष्ट्रीय हित की सेवा होना चाहिए। लघु फिल्म यह दर्शाती है कि कैसे कमलनयन बजाज ने सचेत रूप से ऐसे उद्योगों की स्थापना की, जिन्होंने भारत की आयात पर निर्भरता को कम किया और “आत्मनिर्भर भारत” की परिकल्पना को उस समय साकार किया, जब यह शब्द प्रचलन में भी नहीं आया था। अभिलेखीय दृश्यों में उन्हें उत्तर प्रदेश की गोला चीनी मिल का बार-बार दौरा करते हुए दिखाया गया है, जिसे उनके पिता ने चीनी आयात को रोकने के लिए स्थापित किया था। इन दृश्यों में उनका परिवार और उनके छोटे पुत्र शिशिर भी दिखाई देते हैं, जिन्होंने आगे चलकर बजाज हिन्दुस्थान शुगर के बड़े विस्तार का नेतृत्व किया। फिल्म यह भी दर्शाती है कि कैसे उन्होंने उस समय वैश्विक सहयोग स्थापित किये, जब भारत की अर्थव्यवस्था काफ़ी कमजोर थी। ऐसा ही एक सहयोग बजाज इलेक्ट्रिकल्स के लिए वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पनी फिलिप्स के साथ था और दूसरा इतालवी स्कूटर निर्माता पियाजियो की वेस्पा के साथ, जिससे बजाज का ऑटोमोबाइल व्यवसाय शुरू हुआ। इन अग्रणी साझेदारियों ने कमलनयन बजाज को बजाज समूह का वास्तविक उद्यमी सिद्ध किया, जिन्होंने मूल्य-आधारित विरासत को एक वैश्विक स्तर पर सम्मानित औद्योगिक समूह में रूपांतरित किया। व्यवसाय से परे, कमलनयन बजाज 15 वर्षों तक महाराष्ट्र के वर्धा क्षेत्र से संसद सदस्य रहे और ग्रामीण समुदायों के सामाजिक व आर्थिक विकास के लिए स्वयं को समर्पित किया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, राहत कार्यों और सांस्कृतिक संस्थानों को सुदृढ़ करने में निरंतर योगदान दिया। उन्होंने भारत के राजनीतिक एकीकरण में भी एक शांत किंतु महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, विशेष रूप से रियासतों के एकीकरण के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल की सहायता की। इस योगदान का उल्लेख वी.पी. मेनन ने अपनी पुस्तक में किया है। वीडियो में वर्धा स्थित बजाजवाड़ी को भी पुनः दर्शाया गया है, जो सौहार्द, संवाद और राष्ट्रीय सेवा का प्रतीक बन गई थी। यहाॅं पंडित जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, लाल बहादुर शास्त्री, सरोजिनी नायडू, मोरारजी देसाई, खान अब्दुल गफ्फार खान और यहां तक कि नेपाल के राजा-रानी जैसे अनेक नेता आये। सेवाग्राम आश्रम में गांधीजी से मिलने के लिए ये यात्राऍं इतनी नियमित थीं कि महात्मा गांधी ने बजाजवाड़ी को “राष्ट्रीय अतिथि गृह” कहा था। लोकार्पण के इस महत्वपूर्ण अवसर पर बजाज फाउंडेशन के चेयरमैन श्री शिशिर बजाज ने कहा कि मेरे पिता का मानना था कि जो हम बनाते हैं वह टिकाऊ होना चाहिये और जो टिकाऊ हो, उसे समाज की सेवा करनी चाहिये। उनके लिए उद्योग, सार्वजनिक सेवा और सामाजिक संस्थान—तीनों राष्ट्र निर्माण के अविभाज्य स्तम्भ थे। उन्होंने कहा कि यह श्रद्धांजलि हमारी ओर से आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाने का एक विनम्र प्रयास है कि मूल्य- आधारित उद्यमिता व्यवसाय और समाज दोनों को रूपांतरित कर सकती है। फिल्म कमलनयन बजाज के व्यक्तिगत जीवन पर भी प्रकाश डालती है, जिसमें 19 वर्ष की आयु में सावित्री देवी से उनका विवाह, उनके सभी प्रयासों में उनका अटूट समर्थन और उनके बच्चों द्वारा उनके मूल्यों और दृष्टि को आत्मसात करना मुख्य रूप से शामिल है। उनके बड़े पुत्र राहुल बजाज और छोटे पुत्र शिशिर बजाज ने आगे चलकर उनके द्वारा स्थापित व्यवसायों का उल्लेखनीय विस्तार किया। वर्तमान में यह गरिमापूर्ण विरासत श्री शिशिर बजाज और उनके पुत्रों के माध्यम से आगे बढ़ रही है। उनके बड़े पुत्र कुशाग्र बजाज, जो वर्तमान में उनके व्यवसाय पक्ष के चेयरमैन हैं, और छोटे पुत्र अपूर्व बजाज। वे कमलनयन बजाज के उस मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं जिसमें उद्यम को सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ा गया है। बजाज समूह के औद्योगिक विस्तार से लेकर वर्धा, सीकर और ललितपुर में ग्रामीण विकास पहलों को गहराई देने तक, परिवार सामाजिक- आर्थिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्ध बना हुआ है। डिजिटल और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर जारी यह श्रद्धांजलि फिल्म कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कर अभिलेखीय तस्वीरों को पुनर्स्थापित, सजीव और कथानक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे इतिहास युवा पीढ़ी के लिए सुलभ बनता है और कमलनयन बजाज के जीवन की गरिमा और गम्भीरता भी बनी रहती है। इस सुरुचिपूर्ण फिल्म का इन हाउस प्रोडक्शन, पटकथा लेखन एवं वॉयस ओवर बजाज समूह की कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन्स महाप्रबंधक सुश्री सुरुचि महतपुरकर कोरे द्वारा सुनिश्चित किया गया है। जब राष्ट्र श्री कमलनयन बजाज को उनकी 111वीं जयंती पर स्मरण कर रहा है, तब बजाज परिवार की यह सृजनात्मक श्रद्धांजलि एक कालातीत संदेश दोहराती है कि सच्ची उद्यमिता केवल विस्तार से नहीं, बल्कि राष्ट्र की सेवा और मूल्यों की संरक्षा से परिभाषित होती है।




