
माननीय राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अमरीश सिन्हा की नवीनतम पुस्तक “बक्से का कोट” का गरिमामय लोकार्पण शनिवार, 25 अप्रैल, 2026 को मुंबई के मरीन लाइन्स स्थित वेस्ट एंड होटल में आयोजित सुरुचिपूर्ण समारोह में सम्पन्न हुआ।

सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जानी जाने वाली संस्था “धरोहर” के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य समारोह में महाराष्ट्र सरकार के माननीय कौशल, रोजगार तथा उद्यमिता मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने पुस्तक का विमोचन करते हुए डॉ. सिन्हा को उनकी सृजन यात्रा के लिए हार्दिक शुभकामनाऍं दीं। उन्होंने कहा कि काव्य संग्रह का लोकार्पण तब सार्थक होता है, जब कवि लोकार्पित पुस्तक से कविता का पाठ करे। उनके अनुरोध पर डॉ. अमरीश सिन्हा ने शीर्षक कविता “बक्से का कोट” का पाठ करके श्रोताओं को भावुक कर दिया। कोंकण रेलवे के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा लोकप्रिय साहित्यकार संतोष कुमार झा ने कहा कि डॉ. सिन्हा की कविताओं में भाव इतने गहरे होते हैं कि उनका पाठ धीरे-धीरे ही किया जा सकता है। इससे श्रोता को गहरे पानी पैठ की संवेदनात्मक अनुभूति होती है। उन्होंने पुस्तक से तीन कविताओं का पाठ कर तथा कवि के प्रति अपने उद्गार व्यक्त कर सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। वरिष्ठ लेखक एवं महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के पूर्व कार्याध्यक्ष डॉ दामोदर खड़से ने डॉ. सिन्हा की कविताओं पर चर्चा करते हुए कहा कि इनकी कविताओं में जीवन यात्रा के चित्र उभरते हैं।


उन्होंने यह भी बताया कि डॉ. अमरीश सिन्हा से जो शख़्स एक बार जुड़ता है, वह सदा के लिए इनसे जुड़ जाता है। वरिष्ठ लेखक और साहित्य अकादमी, दिल्ली की पत्रिका के सम्पादक डॉ. बलराम ने अपने अनोखे व बेलाग अंदाज़ में सभा को सम्बोधित किया। यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कम्पनी के पूर्व चेयरमैन मिलिंद ख़रात ने डॉ. सिन्हा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। न्यू इंडिया एश्योरेंस के पूर्व महाप्रबंधक के एस रामकुमार ने कहा कि डॉ. अमरीश सिन्हा ने हिंदी भाषा को व्यवसाय से जोड़ा है और हिंदी साहित्य के माध्यम से बीमा व्यवसाय का सफल संचालन कर रहे हैं। यह उल्लेखनीय और अनुकरणीय है। मशहूर अभिनेता और फ़िल्म निर्देशक डॉ चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने इस अवसर पर कहा कि हृदय में जब पीड़ा की अनुभूति होती है तो कविता का जन्म होता है। “धरोहर” संस्था के अध्यक्ष, लेखक तथा वरिष्ठ एडवोकेट दीनानाथ तिवारी ने बताया कि वर्ष 1996 में स्थापित “धरोहर” संस्था प्रभावी ढंग से सामाजिक और शैक्षणिक कार्यों का नियमित रूप से संचालन कर रही है। उन्होंने संस्था की विकास यात्रा एवं अपने अनुभव के बारे में उपस्थित श्रोता-समूह को रोचक तरीके से अवगत कराया। “धरोहर” संस्था की ओर से कई मनीषियों को इस अवसर पर शॉल, पुष्प गुच्छ एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर उनका सम्मान किया गया। सभागार में महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार, झारखंड और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में लेखक, पत्रकार एवं बुद्धिजीवी पधारे। इनमें के जी के कुरूप, डॉ के के मेहता, मुंबई अक्वा लाइन मेट्रो रेल के कार्यकारी निदेशक मो. आसिम सुलेमान, पूर्व आईएएस अधिकारी और वरिष्ठ लेखक सेवक नैयर, एड. राहुल तिवारी, एड. तृप्ति तिवारी, एड. आकांक्षा, मुकेश गौतम, आनंद प्रकाश सिंह, गजानन महतपुरकर, सदानंद चितले, प्रिया पोकले, श्रेया काकड़े, सतीश धुरी, सीताराम दुबे, प्रसाद सामंत, नितिन नाइक, रोमा बिस्वास, डॉ आरती जड़िया, दीप्ति सोनी, राजेश सिन्हा, तथ्या तिवारी, रेणु सिन्हा, किरण जैसवार, रीमा राय सिंह, कनक लता तिवारी, रोशनी किरण, विजया मगर, आलोक शंकर, रंजू कुमारी, सोनल, तूलिका, मोनिका सिन्हा, अपूर्व देसाई, शुभम श्रीवास्तव, प्रकाशक विकास शर्मा, मधु सावंत और भारत अडसुले आदि मुख्य रूप से सम्मिलित रहे। करीब दो घंटे चले इस भव्य कार्यक्रम का शुभारम्भ राष्ट्र गान, दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना, एवं महाराष्ट्र राज्य गीत से हुआ। जाने-माने मंच प्रस्तोता एवं कवि प्रिंस ग्रोवर ने अपने अनूठे अंदाज़ में समारोह का मंच संचालन कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।



